नम्रता भाभी ने सोचा था यह सिर्फ सपना है — जब तक देवर आदित्य ने एक रात सब कह दिया।
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नम्रता भाभी ने हमेशा सोचा था कि यह सिर्फ उनकी कल्पना है — देवर आदित्य के बारे में। मगर कल्पनाएँ इतनी बार आईं कि वो खुद से डर गईं।
एक रात आदित्य देर से आया और उनके कमरे के पास रुक गया।
"भाभी, जाग रही हैं?"
"हाँ।"
वो अंदर आया। बैठा। चुप रहा।
"क्या सोच रहे हो?" नम्रता ने पूछा।
"आपके बारे में," आदित्य ने सीधे कहा।
नम्रता का दिल रुक गया।
"आदित्य..."
"मुझे पता है यह नहीं कहना चाहिए। मगर मैं थक गया हूँ रोकते-रोकते।"
नम्रता ने उठने के बजाय बिस्तर पर और सिमट गईं। मगर उन्होंने यह नहीं कहा कि जाओ।
आदित्य ने उनका हाथ थाम लिया।
"एक बार।"
नम्रता ने आँखें बंद कर लीं। उनका हाथ उसने नहीं छुड़ाया।
वो रात सपना नहीं था। सब कुछ असली था — उसकी साँसें, उसकी गर्माहट, और वो पल जो नम्रता ने बरसों सोचा था।
सपना उस रात सच हो गया।
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