निखिल और ईशा — रोज़ सुबह लिफ्ट में तीस सेकंड, फिर एक दिन लिफ्ट बंद हो गई।
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रोज़ सुबह लिफ्ट में मुलाकात होती थी। निखिल और पड़ोसी floor की ईशा। तीस सेकंड।
"Good morning।"
"Good morning।"
फिर दरवाज़ा खुलता और वो जाती।
एक दिन लिफ्ट बंद हो गई। बीस मिनट दोनों अंदर।
"डरते हो?" ईशा ने पूछा।
"नहीं।" निखिल ने कहा। "तुम?"
"थोड़ा।"
"पास आ जाओ।"
ईशा हँसी। "पास तो हैं।"
वो सच में पास थे — छोटी लिफ्ट, दोनों के बीच कुछ इंच।
"ईशा..."
"हाँ?"
"रोज़ तीस सेकंड बहुत कम लगते हैं।"
ईशा ने उसकी तरफ देखा।
"इसीलिए मैं रोज़ सुबह थोड़ा जल्दी आती हूँ।"
निखिल हँसा। लिफ्ट चली। मगर इस बार उन्होंने साथ उतरने का फैसला किया — और शाम को साथ जाने का भी।
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