ऑफिस अफेयर

लेट नाइट ओवरटाइम

नेहा और मैनेजर अर्पित — रात नौ बजे ऑफिस में डेडलाइन, और उससे ज़्यादा कुछ।

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रात के नौ बज रहे थे। ऑफिस में बस नेहा और उसका मैनेजर अर्पित बचे थे। डेडलाइन थी कल सुबह। "कॉफी चाहिए?" अर्पित ने पूछा। "हाँ, please।" कॉफी आई। काम चला। धीरे-धीरे दोनों एक ही स्क्रीन पर थे — पास-पास। "यह वाला slide..." अर्पित ने उसकी तरफ झुककर बताया। उसकी बाँह नेहा के कंधे से लगी। दोनों ने देखा। कोई नहीं हटा। "नेहा..." उसकी आवाज़ में कुछ था। "Sir?" "अर्पित। Sir मत कहो।" नेहा ने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखें स्क्रीन पर नहीं थीं। "अर्पित..." उसने धीरे से कहा। उसने उसका हाथ थाम लिया। नेहा ने हटाया नहीं। ऑफिस की रोशनी मद्धिम थी। बाकी सब जा चुके थे। डेडलाइन पूरी हुई — बहुत देर से। मगर उस रात ऑफिस में और भी बहुत कुछ हुआ।
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