बारह साल की शादी, उत्साह कहाँ गया — तरुण ने मीता से कहा चलो, छत पर। उस रात सब मिल गया।
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बारह साल की शादी। सब ठीक था। मगर उत्साह... वो कहाँ थी?
तरुण सोच रहा था।
"मीता," उसने एक रात कहा।
"हाँ?"
"कुछ अलग करें?"
मीता ने उसकी तरफ देखा।
"जैसे?"
"वैसे जैसे पहले करते थे — कहीं जाना, कुछ नया।"
मीता मुस्कुराई।
"तो चलो।"
"अभी?"
"हाँ। रात है। बच्चे सोए हैं। छत पर चलो।"
दोनों छत पर गए। तारे थे।
"कितने दिन हो गए," तरुण ने कहा।
"बहुत।"
उसने उसका हाथ थाम लिया।
मीता ने उसके कंधे पर सिर रख दिया।
"बारह साल," उसने कहा।
"और बारह और।"
"और उसके बाद?"
"उसके बाद भी।"
उस रात छत पर प्यार का नया रंग चढ़ा।
बारह साल पुराना प्यार, नई रोशनी में।
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