रोहन और दीया — कॉलेज के पहले साल में, लाइब्रेरी से शुरू हुई कहानी जो कैंटीन में बदल गई।
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कॉलेज के पहले साल में सब कुछ पहली बार होता है। रोहन के लिए भी।
जब दीया ने पहली बार उससे बात की थी — लाइब्रेरी में — उसका दिल एक बार ज़ोर से धड़का था।
फिर रोज़ मिलने लगे। पढ़ने के बहाने।
एक शाम कैंटीन में अकेले बैठे थे।
"रोहन," दीया ने कहा।
"हाँ?"
"मुझे अच्छे लगते हो।"
रोहन ने चाय नहीं पी।
"मुझे भी तुम।"
दीया हँसी।
"तो क्या करें?"
"यह," रोहन ने कहा और उसका हाथ थाम लिया।
पहली बार उसने किसी का हाथ ऐसे थामा था। दीया ने भी।
दोनों बैठे रहे — हाथ पकड़े, मुस्कुराते हुए, बाकी दुनिया से बेखबर।
कच्ची उम्र का पहला प्यार सबसे खालिस होता है। उसमें कोई हिसाब नहीं होता।
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